Home Ads adnowcharcha1

Latest in Sports

Lifestyle

Home Ads

अपनी आध्यात्मिक अवस्था को कैसे जाने

अप्रैल 08, 2021
  प्रत्येक साधक की कुछ दिन ध्यान साधना करने के बाद यह जानने की इच्छा होती हैं  की मेरी कुछ आध्यात्मिक प्रगति हुई या नहीं और आध्यात्मिक प्रगत...
0 Comments
Read

यह आत्मा चैतन्य है

अप्रैल 07, 2021
  मुक्त है। असीम है।सभी में व्याप्त है। आत्मा को किसी भी बंधन में बांधा नहीं जा सकता शरीर तो सीमित है।  मन बुद्धि सीमित है। यह सारी विविधता ...
0 Comments
Read

आध्यात्म ज्ञान

अप्रैल 06, 2021
अध्यात्म ज्ञान धारण करने का तत्व है हम जितना अध्यात्म को धारण करते जाएंगे उतना ज्यादा ईश्वर का और सत्य का अनुभव करते जाएंगे बिना धारण किए हु...
0 Comments
Read

वास्तविक स्वरूप

अप्रैल 06, 2021
मनुष्य का वास्तविक स्वरूप उसकी आत्मा है। किन्तु मन को ही अपना स्वरूप मान लेता है। अपने को चैतन्य स्वरूप मानने पर साधक चिदानंद स्वरूप में लीन...
0 Comments
Read

कर्म और प्रतिकर्म🌹

अप्रैल 04, 2021
🌹 हम किसे कर्म समझते हैं? हम प्रतिकर्म को कर्म समझे हुए हैं, रिएक्शन को एक्शन समझे हुए हैं। किसी ने गाली दी आपको, और आपने भी उत्तर में गाली...
0 Comments
Read

स्थिर अवस्था चित्त की

अप्रैल 02, 2021
दो विचारो के मध्य जो अवकाश है। वह अवकाश ही उपयोगी है। वही स्थिर अवस्था है। जिस पर ध्यान केंद्रित करने से चेतनतत्व की अनुभूति हो जाती है। जब ...
0 Comments
Read

कुंडलिनी जागरण के सातों चक्र द्वारा स्वयं को खोजना

अप्रैल 02, 2021
कुंडलिनी जागरण के सात ऊर्जा चक्र...... सम्पूर्ण जान कारी..विषय बहुत लम्बा है रुचि हो तो पढ़ लेना...शेयर कर लेना..आध्यात्मिक राह वालों के लिए...
0 Comments
Read

अपनी आध्यात्मिक अवस्था को कैसे जाने

  प्रत्येक साधक की कुछ दिन ध्यान साधना करने के बाद यह जानने की इच्छा होती हैं  की मेरी कुछ आध्यात्मिक प्रगति हुई या नहीं और आध्यात्मिक प्रगति को नापने का मापदंड है  आपका अपना चित्त,आपका अपना चित्त कितना शुद्ध और पवित्र हुआ है  वही आपकी आध्यात्मिक स्थिति को दर्शाता हैं ।अब आपको भी अपनी आध्यात्मिक प्रगति जानने की इच्छा हैं तो आप भी इन निम्नलिखित चित्त के स्तर से अपनी स्वयम की आध्यात्मिक स्थिति को जान सकते हैं ,बस अपने चित्त का प्रामाणिकता के साथ ही अवलोकन करें यह अत्यंत आवश्यक हैं । 1 ) दूषित चित्त --: चित्त का सबसे निचला स्तर हैं  दूषित चित्त  इस स्तर पर साधक सभी के दोष ही खोजते रहता हैं  दूसरा  सदैव सबका बुरा कैसे किया जाए सदैव इसी का विचार करते रहता है  दूसरों की प्रगति से सदैव ईर्ष्या करते रहता हैं  नित्य नए-नए उपाय खोजते रहता हैं की किस उपाय से हम दुसरे को नुकसान पहुँचा सकते हैं  सदैव नकारात्मक बातों से  नकारात्मक घटनाओं से  नकारात्मक व्यक्तिओं से यह  चित्त सदैव भरा ही रहता हैं  2 ) भूतकाल में खोया चित्त --: एक चित्त एसा होता हैं   वः सदैव भूतकाल में ही खोया हुआ होता हैं | वह सदैव भ

Home Ads