मानव की नयी प्रजाति की खोज


छोटे मानव की खोपड़ी
छोटे मानव की खोज मानव विकास के क्षेत्र में अभूतपूर्व है
वैज्ञानिको को इंडोनेशिया के पास मानव की एक अलग और नयी प्रजाति के अवशेष खोज निकालने में सफलता मिली है.
ये मानव कद में बहुत छोटे हुआ करते थे और सिर्फ 12000 साल पहले इंडोनेशिया के फ्लोर्स द्वीप के पास रहा करते थे. इसी दौरान हमारे यानी वर्तमान मानव के पूर्वज भी धरती पर थे और पूरी दुनिया पर अपना कब्ज़ा करने में लगे हुए थे
विज्ञान की प्रतिष्ठित पत्रिका नेचर में इस खोज का खुलासा किया गया है. इंडोनेशिया और खासकर फ्लोर्स द्वीप के पास छोटे मानवों को लेकर कई किवदंतियां प्रचलित हैं.
इन अवशेषों के मिलने के बाद अब वैज्ञानिक किवदंतियों को भी गंभीरता से ले रहे हैं. पिछले कई दशकों में मानव के विकास के क्षेत्र में इसे बहुत बड़ी खोज माना जा रह है.
ऑस्ट्रेलिया के पुरातत्ववेत्ताओ को फ्लोर्स की चूना पत्थर वाली पहाड़ियों में लियांग बुआ नामक जगह पर खुदाई के दौरान इस छोटे मानव के अवशेष मिले.
सिर्फ दस मीटर की गहराई में ये अवशेष मिले और पुरातत्ववेताओं ने पहले इसे किसी बच्चे के अवशेषे समझा. लेकिन बाद में जांच से पता चला कि यह पूर्ण रुप से विकसित मानव है बस कद में छोटे.
छोटे कद के कारण इसे " हॉबिट" नाम दिया गया है. कमर की हड्डियों से यह भी पता चला कि जो अवशेष मिले हैं वो महिला के हैं. पैरो की हड्डियों से पता चला कि ये छोटे मानव भी हमारी तरह तन कर चलते थे.
नयी प्रजाति
क़रीब 18000 साल पुराने अवशेषों को लियांग बुआ नाम दिया गया है और मानव विकास की श्रेणी में इन्हें होमो फ्लोरोसेनसिस नाम दिया गया है. इस प्रजाति के लोग लगभग एक मीटर लंबे होते थे. लंबे हाथों वाले इस मानव की खोपड़ी छोटे नारियल जितनी होती थी..
शोधकर्ताओं को इस तरह के छह मानवों के अवशेष मिले है. हौबिट मानवों के साथ फ्लोर्स द्वीप पर चूहे, बड़े बड़े कछुए और काफी बड़े गिरगिट रहा करते थे.
छोटा मानव
ये मानव हाथियों का शिकार करते थे
सिर्फ छोटे मानव नहीं यहां छोटे हाथी भी रहते थे और माना जा रहा है कि हौबिट इन छोटे हाथियों का शिकार करते थे.
लंदन के नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम के क्रिस स्ट्रींगर बताते हैं कि इन मानवों के लंबे हाथ थोड़ा भ्रम पैदा कर रहे हैं. लंबे हाथों से लगता है कि ये मानव अपना अधिक समय पेड़ो पर बिताते थे.
स्ट्रींगर कहते है कि छोटे मानवों और उनके और भी छोटे बच्चों को बड़े गिरगिट यानी कोमोडो ड्रैगन से बचने के लिए पेड़ सबसे अच्छा सहारा होता होगा.
माना जा रहा है होमो फ्लोरोसेनसिस का विकास होमो इरेक्टस प्रजाति से हुआ है. होमो इरेक्टस क़रीब दस लाख साल पहले इस द्वीप पर आए और बाकी दुनिया से संपर्क कटने के साथ ही भौगोलिक कारणों से वो लंबाई में छोटे रहे.
लेकिन यहां एक बात सोचने लायक है कि फ्लोर्स द्वीप पर नाव से ही आया जा सकता है और नाव बनाने की जानकारी बहुत बाद में होमो सेपियन्स यानी आधुनिक मानव के पास आयी है.
अदभुत प्राणी
यहां सबसे मजेदार बात यह है कि फ्लोर्स द्वीप पर रहने वाले लोग काफी पहले से छोटे मानवों की बात करते रहे है. उनकी कहानियों और किवदंतियों में इन छोटे मानवों का काफी दखल है और स्थानीय लोग इन्हे इबु गोगो कहते हैं.
द्वीपवासियों की कहानियों के अनुसार इबु गोगो एक मीटर लंबा, घने बालों वाला मनुष्य होता था जो किसी और भाषा में फुसफुसा कर बात करता था. ये छोटे मानव द्वीपवासियों की बात को तोते की तरह दुहराते भी थे.
ऑस्ट्रेलिया के न्यू इंग्लैड यूनिवर्सिटी में पुरातत्व के प्रोफेसर और शोध टीम के सदस्य पीटर ब्राउन कहते हैं कि छोटे मानवों के बारे में कहानियां हर जगह रही हैं. चाहे आयरलैड के लेपरेचा हों या ऑस्ट्रेलिया के योवी मानव हो. मुझे लगता है कि यहां भी छोटे मानव के बारे में लोग पूर्वजों से सुनते रहे हैं.
 ये मानव अभी भी जीवित हो सकते हैं और उन्हें इंडोनेशिया के उन जंगलों में खोजा जा सकता है जहां अभी तक कोई नहीं गया है. 
 
हेनरी गी
लियांग बुआ में 12000 साल पहले ज्वालामुखी फटा था और कहा जाता है कि इसके बाद वहां जीवन के निशान खत्म हो गए. लेकिन कुछ संकेत मिले हैं कि हौबिट मानव उसके कई सालों बाद तक पाए जाते रहे.
किवदंतियो के अनुसार इबु गोगो या हौबिट या होमो फ्लोरेसेनसिस कुछ सौ साल पहले उस समय भी देखे गए जब डच शोधकर्ता इंडोनेशिया की तरफ आए थे.
नेचर पत्रिका के वरिष्ठ संपादक हेनरी गी कयास लगाते है कि ये मानव अभी भी जीवित हो सकते हैं और उन्हें इंडोनेशिया के उन जंगलों में खोजा जा सकता है जहां अभी तक कोई नहीं गया है.
जानकारों का कहना है कि इस खोज से विज्ञान की किताबों को दोबारो लिखने की जरुरत पड़ सकती है क्योंकि यह मानव विकास के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व सफलता है. sabhar : bbc.co.uk

3 टिप्‍पणियां:

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