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सम्मोहन विद्या भारतवर्ष की प्राचीनतम और सर्वश्रेष्ठ विद्या है। सम्मोहन विद्या को ही प्राचीन समय से 'प्राण विद्या' या 'त्रिकालविद्या' के नाम से पुकारा जाता रहा है। अंग्रेजी में इसे हिप्नोटिज्म कहते हैं। सम्मोहन का अर्थ वशीकरण नहीं है। आत्म सम्मोहन सीखना सबसे आसान है जटिल है तो बस आपका मन।

सम्मोहन की अवस्था : सम्मोहन व्यक्ति के मन की वह अवस्था है जिसमें उसका चेतन मन धीरे-धीरे तन्द्रा की अवस्था में चला जाता है और अर्धचेतन मन सम्मोहन की प्रक्रिया द्वारा निर्धारित कर दिया जाता है। साधारण नींद और सम्मोहन की नींद में अंतर होता है।

सम्मोहन नींद में हमारा चेतन मन अपने आप सो जाता है तथा अर्धचेतन मन जागृत हो जाता है। अर्थचेतन मन के अलावा हमारा आदिम चेतन मन भी होता है उसके जागने से व्यक्ति आत्मसम्मोहन की पूर्णावस्था में होता है।  पढ़ेंगे कैसे साधे इस मन और आत्म सम्मोहन सीखने का सबसे सरल तरीका।
प्राणायम और ध्यान के लगातार अभ्यास से प्रत्याहार को साधे और प्रत्याहार से धारणा को। जब आपका मन स्थिर चित्त हो, एक ही दिशा में गमन करे और इसका अभ्यास गहराने लगे तब आप अपनी इंद्रियों में ऐसी शक्ति का अनुभव करने लगेंगे जिसको आम इंसान अनुभव नहीं कर सकता। इसको साधने के लिए त्राटक भी कर सकते हैं त्राटक भी कई प्रकार से किया जाता है।

ध्यान, प्राणायाम और नेत्र त्राटक द्वारा सम्मोहन की शक्ति को जगाया जा सकता है। त्राटक उपासना को हठयोग में दिव्य साधना से संबोधित किया गया है। आप उक्त साधना के बारे में जानकारी प्राप्त कर किसी योग्य गुरु के सान्निध्य में ही साधना करें। उक्त मन को सहज रूप से भी साधा जा सकता है। इसके लिए आप प्रतिदिन सुबह और शाम को प्राणायाम के साथ ध्यान करें।

अन्य तरीके : कुछ लोग अंगूठे को आंखों की सीध में रखकर तो, कुछ लोग स्पाइरल (सम्मोहन चक्र), कुछ लोग घड़ी के पेंडुलम को हिलाते हुए, कुछ लोग लाल बल्ब को एकटक देखते हुए और कुछ लोग मोमबत्ती को एकटक देखते हुए भी उक्त साधना को करते हैं, लेकिन यह कितना सही है यह हम नहीं जानते।

सरल तरीका : प्रतिदिन 3 माह तक रात्रि में ध्यान करते-करते सो जाएं। यह अच्छी तरह जान लें की ध्यान में सोना नहीं है। ध्यान नींद से उत्तम है। जब आप ध्यान में सोएंगे नहीं तो आत्म सम्मोहन की अवस्था में पहुंच जाएंगे।

आप चाहे तो सोते सोते ही ध्यान करें। ध्यान करते करते नींद और जागने के बीच पहुंच जाएंगे। नींद में जागे रहने का प्रारंभिक अनुभव ही आत्मसम्मोहन की शुरुआत है। अब आप कुछ भी जानने और शरीर के बगैर कहीं भी जाने के लिए स्वतंत्र हैं। ऐसी अवस्था में आप खुद ही अनुभव करेंगे की आप आत्म सम्मोहित हो गए हैं। अब खुद को किसी भी प्रकार का निर्देश दें।

योग पैकेज : नियमित सूर्य नमस्कार, प्राणायाम और योगनिंद्रा करते हुए ध्यान करें। ध्यान में विपश्यना और नादब्रह्म का उपयोग करें। प्रत्याहार का पालन करते हुए धारणा को साधने का प्रयास करें। संकल्प के प्रबल होने से धारणा को साधने में आसानी होगी है। संकल्प सधता है अभ्यास के महत्व को समझने से। इसके संबंध में ज्यादा जानकारी के लिए मिलें किसी योग्य योग शिक्षक या सम्मोहनविद से। sabhar :
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