डिजिटल ऐप से लोन का कुचक्र ले रहा है लोगों की जान

भारत के दक्षिण के राज्यों में लोन ऐप्स ने धड़ल्ले से लोगों को लोन दिए. लेकिन अब आरोप लग रहे हैं कि कर्ज नहीं लौटाने पर लोगों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया. भारत में डिजिटल ऐप से लोन आसानी से मिल जाता है लेकिन कई बार कर्ज लेने वालों को इतना परेशान किया जाता है कि उन्हें अपनी जान तक देनी पड़ती है. हालांकि लोन देने वाले ये ऐप रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से अधिकृत नहीं हैं. डिजिटल ऐप्स आधे घंटे के अंदर आवेदक को पैसे दे देते हैं, हालांकि इसके बदले वे ऊंची ब्याज दर वसूल करते हैं और एक साथ कई कर्ज देने वाले ऐप्स काम करते हैं. तेलंगाना पुलिस को पिछले कुछ दिनों में कम से कम 90 ऐसी शिकायतें मिली हैं जिनमें कहा गया है कि लोन देने वाले ऐप्स द्वारा उन्हें कर्ज नहीं चुकाने पर परेशान किया जा रहा है. बताया जाता है कि समय पर कर्ज नहीं चुकाने वालों को लगातार लोन ऐप कंपनी की तरफ से फोन कर परेशान किया जाता, मोबाइल पर मैसेज भेजे जाते यहां तक कि उन्हें फर्जी एफआईआर और कोर्ट के नोटिस के मैसेज भी भेजे जाते. रिश्तेदारों और आस पड़ोस के लोगों के सामने कर्ज नहीं चुकाने वालों को ऐप कंपनी के लोग बेइज्जत भी करते. एक अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले एक महीने में ऐसी ऐप आधारित कंपनियों के उत्पीड़न से कथित तौर पर तंग आकर एक इंजीनियर समेत तीन लोगों ने आत्महत्या कर ली है. हैदराबाद एसीपी (अपराध) शिखा गोयल के मुताबिक, "लोन ऐप धोखाधड़ी मामले में अब तक 16 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. शुरुआती जांच में पता चला है कि चार कंपनियां 30 लोन ऐप से जुड़ी हैं." समाचार एजेंसी एएनआइ के मुताबिक पुलिस ने लगभग 10 बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है. इन खातों में कुल 80 करोड़ रुपये की रकम जमा बताई जाती है. चीन के नागरिक लोन ऐप के पीछे तुरंत लोन देने वाले एक ऐप के भारतीय प्रमुख को दिल्ली एयरपोर्ट से बुधवार को उस वक्त नाटकीय अंदाज में गिरफ्तार किया गया जब वह फ्रैंकफर्ट के रास्ते शंघाई भागने की फिराक में था. पासपोर्ट पर लगी उसकी तस्वीर और गुड़गांव में उसकी कंपनी के कॉल सेंटर में काम करने वाली कर्मचारी के मोबाइल से तस्वीर मेल खा गई और वह गिरफ्तार कर लिया गया. इस चीनी नागरिक का नाम झू वेई उर्फ लाम्बो है. तेलंगाना पुलिस ने लोन ऐप घोटाले में अब तक चार चीनी नागरिकों को गिरफ्तार किया है. घोटाला सामने आने के बाद से ही पुलिस जांच में जुट गई थी और हैदराबाद, बेंगलुरू, गुड़गांव और पुणे में कंपनी के कॉल सेंटर पर छापे मारे गए थे. India Mumbai - Surfen auf dem Handy कुछ जरूरी दस्तावेजों के साथ आसानी से कर्ज मिल जाता है. पुलिस ने कॉल सेंटर में काम करने वाले कर्मचारियों से भी पूछताछ की थी और उसी दौरान लाम्बो भूमिगत हो गया. रिपोर्टों के मुताबिक लोन ऐप कंपनियां अब तक करीब 21,000 करोड़ का कारोबार कर चुकी हैं. चीनी नागरिकों के अलावा पुलिस ने ऐप के लिए कॉल सेंटर चलाने वालों को भी गिरफ्तार किया है, कर्जदारों को धमकाने और ब्लैकमेल करने के लिए इन कॉल सेंटरों से फोन करने का आरोप है. लोन चुकाने के लिए लोन! ऐप के जरिए तत्काल लोन देने वाली कंपनियां एक खास तरह से कर्जदारों को अपने जाल में फंसाती हैं. पहला तो उनसे ऊंची ब्याज दर (35 फीसदी तक) वसूलती और बकाया होने पर बदनाम करने की धमकी देती हैं. कई बार कर्जदार को पहले लोन को चुकाने के बदले दूसरे लोन ऐप से लोन दिलवाया जाता जिससे कि कर्ज का कभी खत्म नहीं होने वाला एक चक्र बन जाता. इसी चक्र में फंसकर हैदराबाद की एक कृषि अधिकारी के मोनिका ने अपनी जान दे दी. एक रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने करीब पांच हजार रुपये का लोन ऐप कंपनी से लिया था. जब वे पहला कर्ज नहीं चुका पाई तो कंपनी ने दूसरी कंपनी से लोन दिलवा दिया और ऐसा होते हुए, उन पर 55 ऐप की देनदारी बन गई. पांच हजार का लोन बढ़कर ढाई लाख रुपये का हो गया. बाद में परेशान होकर मोनिका ने खुदकुशी कर ली. हालांकि उन्होंने यह कर्ज संकटग्रस्त किसानों की मदद के लिए लिया था. कैसे मिलता है आसानी से लोन लोन ऐप कंपनी आसानी से ऐसे लोगों को कर्ज दे देती है जिनके पास कुछ अहम दस्तावेज होते हैं, जैसे कि पैन कार्ड, आधार, आधार से जुड़ा हुआ मोबाइल नंबर, कंपनी द्वारा दिए वेतन का विवरण, बैंक खाते की जानकारी आदि. इन सब दस्तावेजों को ऐप पर अपलोड करना पड़ता है और उसके बाद कंपनी दस्तावेजों की छानबीन करने के बाद आवेदक के बैंक खाते में कुछ ही मिनटों में कर्ज की रकम ट्रांसफर कर देती है. sabhar dw:de

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