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सोमवार, 16 अगस्त 2021

ट्रेन विद हाइड्रोजन फ्यूल सेल

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कुछ दिनों पहले एक खबर पढ़ी थी, कि जर्मनी दुनिया का पहला देश बनने जा रहा है, जहां हाइड्रोजन फ्यूल सेल से ट्रेन चलेंगी.... ऐसा ही कुछ रिसर्च और ट्रायल पोलैंड में भी होने की खबर आ रही है.

हाइड्रोजन फ्यूल सबसे क्लीन फ्यूल कहलाता है, जिसमें कार्बन फुटप्रिंट भी negligible होता है, और आपको डीजल या electricity की जरूरत नहीं रहती ट्रेन चलाने के लिए, जो किसी भी रेलवे सिस्टम को हर साल सैंकड़ो करोड़ की बचत करा सकता है।

मैं सोच रहा था, भारत में ये टेक्नोलॉजी या ये माइंडसेट आने में ही 10-15 साल लग जाएंगे... लेकिन यहां मैं गलत साबित हुआ। 

बड़ी खबर ये है, कि भारतीय रेलवे ने हाइड्रोजन फ्यूल पर काम करना शुरू कर दिया है, और अगर सब कुछ सही रहा तो हम दुनिया में दूसरे या तीसरे देश होंगे जहां हाइड्रोजन फ्यूल से चलने वाली ट्रेन होंगी।

इंडियन रेलवे ने Bids invite की है, जिसमें Private players को आमंत्रित किया गया है। डीजल से चलने वाली ट्रेन में हाइड्रोजन फ्यूल सेल लगाने के लिए। साथ ही इन ट्रेन में सोलर पेनल्स भी लगे होंगे....ये प्रोजेक्ट अक्टूबर से शुरू होने जा रहा है।

सोनीपत-जींद section की 2 DEMU trains का चुनाव किया गया है, इनमें ये सिस्टम लगाया जाएगा। सोलर पैनल से बनने वाली बिजली द्वारा पानी का electrolysis करके हाइड्रोजन अलग किया जाएगा और फिर Hydrogen Fuel Cell System द्वारा energy generate करके ट्रेन चलाई जाएगी। बाद में धीरे धीरे सभी डीजल train को hydrogen fuel पर migrate किया जाएगा।

मात्र इन दो ट्रेन को हाइड्रोजन से चलाने पर साल के 2.3 करोड़ रुपये के fuel bill की बचत होगी, अब आप अंदाजा लगा लीजिये, हमारे पास हजारों ट्रेन हैं, सभी में ये सिस्टम लगेगा तो कितनी बचत होने वाली है।

ऊपर से इस technology का उपयोग करने से Carbon Footprints (NO2) भी 11 Kilo Tonnes Per annum कम होगा, अगर इसे समूची इंडियन रेलवे में लगा दिया जाए तो समझिए कितना प्रदूषण हमेशा के लिए कम हो जाएगा।

इसके साथ ही भारत दुनिया में अकेला देश है जहां 1000 से ज्यादा रेलवे स्टेशन्स को पूरी तरह से Solar powered बनाया जा चुका है, और 2030 तक भारतीय रेलवे के सभी स्टेशन्स सोलर powered होंगे। इसके अलावा 50 के लगभग trains को भी सोलर पावर से चलाने के लिए काम किया जा रहा है।

ये वही इंडियन रेलवे है, जो कुछ साल पहले तक रेल मंत्री के राज्य में नई train शुरू करने की घोषणा तक सीमित हुआ करती थी। आये दिन एक्सीडेंट की खबरें, और हर साल हजारो मौतें हुआ करती थीं। बदबू से सराबोर रेलवे प्लेटफॉर्म, गंदगी से भरी हुई ट्रेन की पटरियां..…सने हुए टॉयलेट्स हुआ करते थे.... आज ये सब बदल चुका है।

अब रेल मंत्री कौन है, कौन से प्रदेश से है, किसी को नहीं पता। आज बात होती है तेजस की, बुलेट की, vistadome की, अत्याधुनिक DEMU की... वहीं पिछले 2 साल में इंडियन रेलवे accident free रहा है, एक भी मौत नहीं हुई... देश में एक भी crossing अब बिना controlled barrier के नहीं है, उन क्रासिंग पर हर साल हजारों मारे जाते थे, अब कोई नहीं मरता।

प्लेटफॉर्म्स और स्टेशन की सफाई world class है... हर train में Bio Toilet लग चुका है, जिससे ना सिर्फ टॉयलेट्स साफ रहते हैं, बल्कि पटरियां भी चौचक रहती हैं।

सुविधाएं बढ़ गयी हैं, वहीं innovation पर काम चल रहा है... सोलर और हाइड्रोजन जैसी टेक्नोलॉजी अपनाने में भारत दुनिया में सबसे आगे है।

और फिर कुछ दिलजले आते हैं और हाथ हिला हिला कर कहते हैं, कुछ नहीं बदला 7 साल में... ऐसे लोगों के लिए सरकार को रतौंधी, cataract और मोतियाबिंद का इलाज फ्री कर देना चाहिए 😊😊
               तस्वीर सांकेतिक है
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